खाटू श्याम जी का मंदिर: दर्शन समय, आरती, निशान यात्रा, कैसे पहुंचे और घूमने की जगहें

📅 11 August 2026 📂 भक्ति यात्रा

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का मंदिर भक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। माना जाता है। खाटू श्याम जी कलयुग के भगवान हैं, जिन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता हैं। यहा  सच्चे मन से की गई प्रार्थना को  बाबा खाटू श्याम जरूर स्वीकार करते हैं। यहा हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं।

खाटू श्याम जी का मंदिर

कौन हैं बाबा खाटू श्याम जी?

महाभारत काल में भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक एक महान और पराक्रमी योद्धा थे। वीर बर्बरीक बचपन से ही अत्यंत बलशाली और वीर थे। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे। कुछ मान्यताओं के अनुसार यह भी कहा जाता है की यह तीन बाण उन्हें मां कामाख्या जी की आराधना से प्राप्त हुए थे। इन बाणों की शक्ति से वे अकेले ही पूरे युद्ध का परिणाम बदल सकते थे।

जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, तब बर्बरीक ने अपनी माता अहिलावती जी को वचन दिया कि युद्ध में जो भी पक्ष हारेगा, वे उसी का साथ देंगे। इसी कारण उन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है।

तब भगवान श्री कृष्ण चिंतित हो गए, क्योंकि बर्बरीक बार-बार हारने वाले पक्ष का साथ देकर युद्ध को अंतहीन बना सकते थे। भगवान श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण करके बर्बरीक की परीक्षा ली और उनसे दान में उनका शीश मांग लिया।

बर्बरीक जी ने बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया। उनकी भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलयुग में तुम मेरे श्याम नाम से पूजे जाओगे ।

इसी शीश को बाद में राजस्थान के खाटू में स्थापित किया गया, जो आज खाटू श्याम जी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।

खाटू श्याम मंदिर राजस्थान में कहाँ स्थित है?

खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

खाटू श्याम जी की निशान यात्रा क्या है?

खाटू श्याम जी की निशान यात्रा एक धार्मिक पदयात्रा है, जिसमें भक्त हाथ में बाबा श्याम का ध्वज यानी निशान लेकर निसान भवन से अथवा प्राचीन खाटू श्याम मंदिर से लगभग 18 km की यात्रा पेदल चलकर खाटू धाम पहुंचते हैं और उसे बाबा के चरणों में अर्पित करते हैं। निशान को भक्त अपनी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानते हैं।

खाटू श्याम जी की निशान यात्रा कब करनी चाहिए?

निशान यात्रा पूरे साल श्रद्धा के अनुसार की जा सकती है, लेकिन फाल्गुन मेले के दौरान इसका विशेष महत्व रहता है। इस समय बड़ी संख्या में भक्त निशान लेकर खाटू धाम पहुंचते हैं।

खाटू श्याम की निशान यात्रा कहां से शुरू होती है?

निसान यात्रा के लिए निसान भवन से अथवा प्राचीन खाटू श्याम मंदिर से खाटू धाम की दूरी लगभग 18 किलोमीटर है और भक्त यह दूरी पैदल तय करके मंदिर पहुंचते हैं।

निशान यात्रा कितने बजे शुरू करनी चाहिए?

निशान यात्रा शुरू करने का कोई एक निश्चित समय नहीं है। गर्मी के मौसम में सुबह जल्दी यात्रा शुरू करना बेहतर रहता है, जबकि फाल्गुन मेले के दौरान प्रशासन और मंदिर व्यवस्था के अनुसार मार्ग व समय में बदलाव हो सकता है। यात्रा से पहले उस दिन की व्यवस्था और मंदिर का समय जरूर जांच लें।

खाटू श्याम जी का निशान कैसे तैयार करें?

निशान के लिए आमतौर पर एक डंडे पर श्याम बाबा का ध्वज लगाया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इसमें मोरपंख, फूलों की माला और छत्र आदि लगा सकते हैं। निशान की पूजा करके यात्रा शुरू की जाती है।

खाटू श्याम मंदिर में निशान कैसे चढ़ाएं?

खाटू धाम पहुंचने के बाद भक्त बाबा श्याम के मंदिर में दर्शन करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार निशान अर्पित करते हैं। निशान अर्पित करने की व्यवस्था मंदिर के सेवादारों द्वारा द्वार  पर की जाती है

निशान यात्रा के लिए जरूरी बातें

  • आरामदायक कपड़े।
  • पर्याप्त पानी साथ रखें।
  • गर्मी में दोपहर की तेज धूप से बचें।
  • फाल्गुन मेले में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है, इसलिए पहले से यात्रा की योजना बनाएं।
  • निशान यात्रा के दौरान मंदिर प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था के निर्देशों का पालन करें।
  • निशान को श्रद्धा और सम्मान के साथ रखें। ओर यात्रा के दोरान जमीन पर ना रखे

 

खाटू श्याम मंदिर कैसे पहुंचे?

रेल मार्ग से खाटू श्याम कैसे पहुंचे?

खाटू श्याम का nearest railway station रिंगस जंक्शन है, जो मंदिर से लगभग 18 किलोमीटर दूर है। जयपुर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 80 किलोमीटर है।

सड़क मार्ग से खाटू श्याम कैसे पहुंचे?

जयपुर, दिल्ली और अन्य शहरों से खाटू श्याम के लिए बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है।

हवाई मार्ग से खाटू श्याम कैसे पहुंचे?

नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जहां से खाटू श्याम की दूरी लगभग 80 किलोमीटर बताई गई है।

खाटू श्याम मंदिर के दर्शन का समय

खाटू श्याम मंदिर के दर्शन का समय सुबह 5:30 AM से शाम 10:00 PM है।

खाटू श्याम मंदिर में रहने की व्यवस्था

खाटू में श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला और होटल की व्यवस्था मिल जाती है। धर्मशाला में लगभग ₹300 से ₹500 और होटल में ₹500 से ₹1,000 तक का कमरा मिल जाता है।

खाटू श्याम मंदिर के आसपास खाने-पीने की व्यवस्था

मंदिर के आसपास शुद्ध शाकाहारी भोजन आसानी से मिल जाता है। भोजन की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 पर पर्सन आसानी से मिल जाती है।

खाटू श्याम के पास घूमने की जगहें

  • जीण माता मंदिर – खाटू श्याम से लगभग 26–30 किमी दूर स्थित माता जीण का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।
  • हर्षनाथ मंदिर – खाटू श्याम से करीब 30–40 किमी दूर स्थित भगवान शिव का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है।
  • सालासर बालाजी मंदिर – खाटू श्याम से लगभग 90–100 किमी दूर स्थित भगवान हनुमान का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
  • श्याम कुंड – खाटू श्याम मंदिर के पास स्थित पवित्र कुंड है, जिसका धार्मिक महत्व माना जाता है।

खाटू श्याम जी की आरती

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे॥

खाटू श्याम जी का जन्मदिन कब मनाया जाता है?

खाटू श्याम जी का जन्मदिन फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी एकादशी) के दिन मनाया जाता है। यह आमतौर पर फरवरी या मार्च महीने में आता है।

खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए जरूरी टिप्स

सबसे पहले कोशिश करें कि सुबह जल्दी दर्शन करने पहुंचें। इससे लंबी लाइन और भीड़ से काफी हद तक बचने में मदद मिल सकती है।

यात्रा के दौरान अपने सामान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि भीड़भाड़ वाली जगहों पर सामान खोने का खतरा बना रहता है।

अगर आप त्योहारों या मेलों के समय जा रहे हैं, तो पहले से होटल या धर्मशाला की बुकिंग कर लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि उस समय बहुत ज्यादा भीड़ होती है। ओर ऐसे मे अपना सामान व जूते चप्पल होटल पर ही रख कर दर्शन के लिए जाए

इसके अलावा शनिवार, रविवार, एकादशी और अन्य छुट्टियों के दिन यात्रा करने से बचे विशेष कर बुजुर्ग ओर बच्चों के साथ, क्योंकि इन दिनों खाटू श्याम जी मंदिर में ज्यादा भीड़ रहती है।

खाटू श्याम जी के प्रमुख उत्सव

  • फाल्गुन मेला
  • एकादशी और द्वादशी विशेष पूजा
  • जन्मोत्सव

फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी से जुड़े प्रमुख उत्सवों में सबसे बड़ा मेला बताया गया है।

क्यों प्रसिद्ध है खाटू श्याम जी मंदिर?

खाटू श्याम जी मंदिर प्रमुख रूप से भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। इसे मनोकामनाएं पूरी करने वाले भगवान और चमत्कारी मंदिर के रूप में भी श्रद्धा से देखा जाता है।

खाटू श्याम जी का प्रिय मंत्र क्या है?

श्री खाटू श्याम जी का प्रसिद्ध मंत्र ॐ श्री श्याम देवाय नमः” है। इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

 

खाटू श्याम जी से जुड़े FAQ

खाटू श्याम जी कौन हैं?

खाटू श्याम जी भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र महाभारत के वीर बर्बरीक है ।

खाटू श्याम जी का मंदिर कहाँ स्थित है?

खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है।

खाटू श्याम मंदिर का समय क्या है?

मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5:30 बजे से शाम 10:00 बजे तक है।

खाटू श्याम जी की आरती कब होती है?

खाटू श्याम जी की मंगला आरती सर्दियों में सुबह 5:30 बजे और गर्मियों में सुबह 4:30 बजे होती है। संध्या आरती सर्दियों में शाम 6:30 बजे और गर्मियों में शाम 7:30 बजे होती है। विशेष पर्वों पर समय में बदलाव हो सकता है।

खाटू श्याम का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?

खाटू श्याम मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रिंगस जंक्शन है, जो लगभग 18 किलोमीटर दूर है।

खाटू श्याम जी को हारे का सहारा क्यों कहा जाता है?

बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि युद्ध में जो पक्ष हार रहा होगा, वे उसका साथ देंगे। इसी कारण उन्हें हारे का सहारा कहा जाता है।